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धोबनी सेक्टर में गर्म भोजन योजना का भ्रष्टाचार उजागर :अवैध वसूली के आरोप में महिला पर्यवेक्षक का तबादला, अब कड़ी कार्रवाई की माँग तेज

चित्रसेन घृतलहरे, vandebharatlivetvnews/समृद्ध भारत //भटगांव परियोजना (महिला एवं बाल विकास विभाग) अंतर्गत धोबनी सेक्टर में गर्म भोजन योजना के नाम पर चल रहे कथित भ्रष्टाचार का मामला उजागर होने के बाद विभाग को आखिरकार कार्रवाई करनी पड़ी है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से प्रति माह 200-200 रुपये की अवैध वसूली करने के गंभीर आरोपों के चलते विवादों में घिरी महिला पर्यवेक्षक सुरतिया खरे को विभाग ने धोबनी सेक्टर से हटा दिया है।
शिकायत के बाद खुली पोल
यह मामला तब सामने आया जब धोबनी गांव के युवा नेता रोहित कुमार साहू ने जिला कार्यक्रम अधिकारी, सारंगढ़ को लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पर्यवेक्षक द्वारा सेक्टर के प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र से हर महीने जबरन पैसों की मांग की जाती थी।
यदि कोई कार्यकर्ता पैसे देने से मना कर दे, तो उसे—
अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता,
कार्यों में बाधाएं खड़ी की जातीं,
मानसिक दबाव बनाकर डराया-धमकाया जाता था।
शिकायत मीडिया में प्रसारित होते ही विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे और जनदबाव तेजी से बढ़ने लगा।
विभाग की त्वरित कार्रवाई
लगातार विवाद और बढ़ती आलोचना के बीच विभाग ने तत्काल जांच प्रारंभ की।
21 जनवरी 2026 को भटगांव परियोजना अधिकारी विजय प्रभात सरल ने आदेश जारी करते हुए महिला पर्यवेक्षक सुरतिया खरे को धोबनी सेक्टर से हटाकर सलौनीकला सेक्टर में स्थानांतरित कर दिया।


क्या सिर्फ ट्रांसफर ही भ्रष्टाचार की सजा?
अब बड़ा सवाल यह है—
क्या केवल स्थानांतरण करके भ्रष्टाचार को दबाया जा सकता है?
क्या विभाग उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कानूनी और विभागीय कार्रवाई करेगा?


ग्रामीणों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि मात्र तबादला कोई सजा नहीं है।
उनका कहना है कि यदि दोषियों पर कठोर विभागीय कार्रवाई नहीं होती, तो भविष्य में अधिकारी गरीब महिला कर्मचारियों से वसूली करने में और भी निर्भीक हो जाएंगे।
साख बचाने की कोशिश या भ्रष्टाचार पर चोट?
विभाग ने ट्रांसफर आदेश जारी कर भले ही अपनी साख बचाने की कोशिश की हो, लेकिन अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि—
क्या विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कठोर दंड देगा?
या यह कार्रवाई सिर्फ दिखावे तक सीमित रह जाएगी?
फिलहाल, धोबनी सेक्टर का यह मामला आंगनवाड़ी व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि अवैध वसूली करने वालों को सख्त सजा मिले, तभी भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लग सकेगा।

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